शनिवार, 25 जनवरी 2020

मौनी अमावस्या


                              मौनी अमावस्या
        
           मिसराइन काकी ने इस बार छोटकी के साथ मौनी अमावस्या का स्नान करने का विचार बनाया। मिसराइन की उम्र ज्यादा हो चली थी,सहारे के लिए उनकी पोती छोटकी साथ जा रही थी। मिसराइन का घर राम आसरे के पड़ोस में ही था। रामआसरे छोटकी के जाने की सूचना पर कुलबुला रहे थे।बहुत प्रयास करने के बाद भी पिताजी साथ ले जाने को तैयार न हुए।रामआसरे ने निहोर के साथ बस से जाने का प्लान बनाया।
         छोटकी कानूनन वयस्क होने की दहलीज पर थी,पर समाज की नजर में वह दहलीज कब की पार कर चुकी थी।सुबह जब बोलेरो पर सब बैठने लगे तो राम आसरे के पिताजी सीटिंग प्लान सेट कर रहे थे कि छोटकी के बगल में बैठें।सर्वसम्मति से तय हुआ कि रामआसरे के पिताजी सबसे बुजुर्ग हैं,उन्हें आगे बैठाया गया।राम आसरे के पिताजी को अपने बुजुर्ग होने पर बहुत अफसोस  हुआ। बोलेरो प्रयाग राज के लिए निकल ली।
      रामआसरे भी घंटा भर पहले नीहोर के साथ बस पकड़ चुका था।बस में गाना बज रहा था...
                  आज उनसे मिलना है हमें....।
रामआसरे पहली बार प्रयागराज जा रहा था।निहोर अपनी मां का इलाज कराने प्रयागराज जा चुका था,इस कारण अनुभव को नेतृत्व मिला।बस सिविल लाइन पहुंची,राम आसरे नीहोर के पीछे हो लिया। गांव में हमेसा रामआसरे ही आगे होता था,पर यहां उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था,एकदम भौचक्का था। इतना बड़ा शहर पहली बार रामआसरे देख रहा था।जब कुंभ मेला में पहुंचा तो दृश्य देखकर एकदम सन्न था।मेला का मतलब वह गांव का मेला समझा था। मन में यही सोच रहा था छोटकी कहां मिलेगी इस भीड़ में।भीड़ में चलता रहा,निगाहें छोटकी को तलाश रही थी।पूरा मेला घूम डाला छोटकी कहीं न दिखी।तय हुआ कि स्नान कर लिया जाय।पहले निहोर गयाराम आसरे कपड़े की रखवाली कर रहा थानीहोर स्नान करके आया।अब राम आसरे की बारी थी।
      राम आसरे महसूस कर रहा था कि उसका आत्मविश्वास काफी कम हो गया है,भीड़ में जैसे उसकी निर्णयन क्षमता कम हो गई थी।राम आसरे ने तय किया कि गंगा में सात डुबकी लगाएगा।पता नहीं क्यूं उसको लग रहा था पांच डुबकी में बात नहीं बन पाएगी।परंतु,ठंड के कारण टारगेट पूरा नहीं हो पाया।पांच डुबकी में ही उसकी सांसे थमने लगी।प्रत्येक डुबकी में गंगा मैया से यही प्रार्थना करता कि छोटकी मिल जाय।बाहर निकला तो समझ नहीं पा रहा था कि निहोंर कहां खड़ा है।इधर उधर सब जगह ढूंढ़ मारा, पर नीहोंर नहीं मिला।रामआसरे चढ्ढी में ठंड से कांप रहा था।समय बीतने के साथ राम आसरे पागल हुआ जा रहा था।छोटकी का विचार मन से गायब था।"हे नीहोंर भैया" दोहराते हुए पागलों की भांति नीहोंर को ढूंढ़ रहा था।पहली बार नीहोर को 'भैया' से संबोधित कर रहा था। एकदम दहाड़ मारकर रोने ही वाला था कि छोटकी दिख गई।
        राम आसरे जैसे डूब रहा था,डूबते को तिनके का सहारा मिल गया। एकदम भावुक होकर दौड़कर छोटकी से लिपटकर रोने लगा।छोटकी राम आसरे को देख नहीं पाई थी,अकबकाकर चिल्ला पड़ी।फिर क्या था,भीड़ ने वही किया जो अक्सर वह करती है।
         
       
   
      

सोमवार, 20 जनवरी 2020

न्यूनतम समर्थन मूल्य

प्रश्न -  न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है ?क्या यह उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों को लाभ प्रदान करता है ?तर्क दीजिए।

उत्तर -न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार का किसानों को यह आश्वासन है कि उपज का मूल्य एक न्यूनतम सीमा से कम नहीं होने दी जाएगी ।यदि मूल्य इस सीमा से कम होता है तो सरकार उपज को खरीदने के लिए जिम्मेदार होगी। सरकार  प्रत्येक वर्ष दो बार (रवि एवं खरीफ फसल की बुवाई के पूर्व)न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है। कुल 24 कृषि उपयोग के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाती है।
          न्यूनतम समर्थन मूल्य का उद्देश्य उपभोक्ता एवं उत्पादक दोनों के हितों को सरंक्षण प्रदान करते हुए कृषि उपजो के मूल्य को स्थिर बनाए रखना है,जिससे अर्थवयवस्था में मुद्रास्फीति से बचा जा सके।न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज को खरीदकर जहां एक ओर कृषकों के हितों को सरंक्षण प्रदान किया जाता है तो वहीं दूसरी ओर इस खरीद से संचित बफर स्टॉक को जारी कीमत पर PDS के माध्यम से उपभोक्ता को,जो बाजार मूल्य से कम होता है,निर्गत कर दिया जाता है।
         न्यूनतम समर्थन मूल्य में केवल कुछ फसलों को ही सम्मिलित किए जाने के कारण कृषि वस्तुओं के मूल्य में स्थिरता ला पाना बहुत ही कठिन हो रहा है।सब्जियों के मूल्य में विशेष रूप से हाल ही में प्याज की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है।इसी प्रकार कुछ महत्वपूर्ण फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य में आच्छादित न होने के कारण तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य का कम होने के कारण यह कृषकों को भी संतुष्ट नहीं कर पा रहा है।
        उपर्यक्त विश्लेषण से स्पस्ट है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का उद्देश्य उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों के हितों का संरक्षण करना है,परंतु अपनी सीमाओं के कारण यह अपने उद्देश्य में पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रहा है।

बेरोजगारी का कारण और सरकारी प्रयास


प्रश्न- भारत में बेरोजगारी का प्रमुख कारण क्या है ?इसको दूर करने हेतु सरकार द्वारा क्या प्रयास किया जा रहा है?
उत्तर-  जब व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर कार्य करने को तैयार हो फिर भी उसे कार्य ना मिले तो ऐसे लोगों को बेरोजगार की संज्ञा दी जाती है। बेरोजगारी स्वयं में समस्या होकर यह कई समस्याओं का कारण भी है। यही कारण है कि इसे गंभीरता से लिया जाता है।
        बेरोजगारी के लिए कोई एक अकेला कारण जिम्मेदार नहीं यह कई कारणों के सम्मिलित प्रभाव का परिणाम है। आधारभूत संरचना की कमी, जनसंख्या का विशाल आकार,अकुशल श्रम, तकनीकी शिक्षा की कमी, पूंजी गहन तकनीकों का प्रयोग, लोगों में जागरूकता की कमी, आराम पसंदगी आदि ऐसे कारण हैं जो बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में बेरोजगारी की वर्तमान दर लगभग 9% प्रतिशत हैं। यह एक गंभीर स्थिति है ।बेरोजगारी से कई प्रकार की मनोसामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
       नियोजन काल के प्रारंभ में यह स्वीकार किया गया था कि यदि समृद्धि को बढ़ाया जाए तो गरीबी बेरोजगारी आदि समस्याएं अपने आप ही समाप्त हो जाएंगी।इसलिए प्रारंभ में बेरोजगारी पर विशेष रूप से फोकस नहीं किया गया।इसके पीछे निस्यंदन प्रभाव (trickle down theory) की अवधारणा काम कर रही थी।परंतु बाद के वर्षों में यह महसूस किया गया कि ट्रिकल डाउन थिअरी से समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा,इसलिए बेरोजगारी के लिए स्पष्ट नियोजन आवश्यक है ।उसके बाद से ही सरकार द्वारा बेरोजगारी पर प्रहार करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम लाए गए। रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए रोजगार उपलब्ध कराती है तथा सरकारी प्रतिष्ठानों एवं तंत्र के लिए भी रोजगार उपलब्ध कराती है ।स्वरोजगार के लिए सरकार द्वारा ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है तथा कौशल विकास के माध्यम से लोगों को लोगों में स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाता है। रोजगार कार्यक्रमों में मनरेगा का महत्वपूर्ण योगदान है,जिसकी प्रशंसा अंतरराष्ट्रीय संस्था आईएलओ द्वारा भी की गई है। इस प्रकार हम देखते हैं कि सरकार द्वारा लोगों को रोजगार भी दिया गया है तथा उन्हें प्रशिक्षण के माध्यम से स्वरोजगार के लिए सक्षम करने का प्रयास भी किया गया है। सरकार इस दो तरफा रणनीति के माध्यम से बेरोजगारी को दूर करने का प्रयास कर रही है।
       विशाल जनसंख्या के कारण सरकार द्वारा किए गए उक्त प्रयास नाकाफी सिद्ध हुए हैं। वर्तमान समय के इकोनामिक स्लोडाउन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है ।अतः इस दिशा में सरकार द्वारा कुछ कठोर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है जिससे रोजगार में वृद्धि की जा सके।

नगरीकरण की समस्या

प्रश्न-   भारत में नगरीकरण की प्रमुख समस्याएं क्या हैं?

उत्तर-   भारत गांवों में बसता है,ऐसा सामान्य कथन भारत के संदर्भ में किया जाता रहा है।यह इसलिए क्योंकि भारत की अधिकांश जनसंख्या गांव में बसती है। आज भी देश का शहरीकरण मात्र   31.16 प्रतिशत है, जिसका अभिप्राय है कि भारत की  68.84 प्रतिशत जनसंख्या आज भी गांव में निवास करती है।परंतु,विगत दशकों में भारत के नगरीकरण में वृद्धि देखी गई है।बढ़ते नगरीकरण से जहां सुख-सुविधाओं में वृद्धि हुई है,वहीं नगरीकरण से कई मनोसमाजार्थिक समस्याएं भी उत्पन्न हुई है।
          शहरों में स्वास्थ्य शिक्षा एवं रोजगार की संभावनाएं गांव से बेहतर हैं जिसके आकर्षण प्रभाव के कारण गांव से शहरों की ओर पलायन होता है। गांव में आधारभूत संरचना की कमी से उत्पन्न प्रतिकर्षण प्रभाव के कारण भी गांव से शहरों की ओर पलायन देखा जाता है। इन सब के संयुक्त प्रभाव के कारण शहरों की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है जिसके कारण शहरों में कई प्रकार की मनोसामाजिक, आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं ।यह समस्याएं निम्न हैं -
१-शहरों के अनियोजित विकास के कारण पर्यावरण का संकट उत्पन्न हुआ है। प्रदूषण शहरों की एक प्रमुख समस्या है,जिसके कारण स्वास्थ्यगत समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
२-रोजगार की चाहत में गांव से लोग शहर की ओर आ जाते हैं,परंतु सभी लोगों को रोजगार नहीं दिया जा सकता। रोजगार नहीं प्राप्त कर पाने की स्थिति तथा घर से लंबे समय से दूर रहने के कारण यह लोग कई प्रकार की असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं , जो कानून व्यवस्था के लिए समस्या उत्पन्न करते हैं।
३-बढ़ते वाहनों से ट्रैफिक की समस्या शहरों की आम समस्या हो गई है ।दिल्ली का उदाहरण हमें पता है। चौड़ी सड़कों के बावजूद ट्रैफिक की समस्या झेलनी पड़ती है, जिससे समय एवं संसाधन दोनों की बर्बादी होती है।
४-अनियोजित विकास एवं सीवर की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण थोड़ी वर्षा से ही शहर में बाढ़ की समस्या आ जाती है। कई बार यह बाढ़ जनधन की ढेर सारी बर्बादी करता है।
५-शहर में या शहरों के आसपास बढ़ता उद्योगी करण कई प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न करता है। उद्योगों से निकला हुआ कच्चा पदार्थ जमीन के अंदर अवैज्ञानिक ढंग से निक्षेपित कर दिया जाता है जो जल प्रदूषण का कारण बनता है। पंजाब और हरियाणा में उद्योगों से निकले अपशिष्ट को जमीन के अंदर बिना परिशोधित किए डाल दिया जाता था जिससे जल प्रदूषण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस तरह के जल प्रदूषण से कैंसर जनित रोगों में तेजी से वृद्धि हुई है।
५-शहरी जीवन से लोगों की आदतों,जीवनशैली तथा उपभोग पैटर्न में व्यापक परिवर्तन हुआ है। इस बदलाव से हमारा समायोजन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण जीवनशैली से जुड़ी तमाम प्रकार की बीमारियां लोगों को हो रही हैं ।अवसाद की स्थिति में लोगों के आपसी संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं तथा आय का अधिकांश हिस्सा चिकित्सा पर खर्च किया जा रहा है।
        शहरीकरण से उपजी उपर्युक्त समस्याओं के कारण ही विकसित देशों में पलायन का स्वरूप बदला है तथा अब लोग शहरों से गांव की ओर स्थानांतरित होने लगे हैं। नियोजित विकास तथा त्याग पूर्वक उपभोग से उपर्युक्त समस्याओं को कम किया जा सकता है। गांव की आधारभूत संरचना का विकास करके पलायन को रोका जा सकता है। ऐसा करके ही हम शहरीकरण की समस्या से निजात पा सकते हैं।

शनिवार, 4 जनवरी 2020

यक्ष प्रश्न

                             यक्ष प्रश्न

            इस साल ठंडक तो जैसे जान लेकर ही मानेगी।पूरा विंटर वैकेसन रजाई में ही ख़तम हो गया।रामआसरे का अवकाश अपने अनुसार तय होता है।सर्दी की छुट्टी के चार दिन बाद रामआसरे कॉलेज आया है।रामआसरे का पिछले चार साल से इंटर फाइनल हो रहा है। वर्तमान 'फेलमुक्त' और 'छात्र फ्रेंडली' शिक्षा व्यवस्था भी रामआसरे को पास कराने में असफल सिद्ध हुई है,हालांकि पूरी तरह नही क्योंकि इसी व्यवस्था के तहत रामआसरे हाई स्कूल में बाजी मारे थे।नई शिक्षा नीति के लिए रामआसरे चुनौती हैं। मौसम खराब होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि रामआसरे का फाइनल, खेल की तरह आगे के लिए शिफ्ट हो गया है।
            रामआसरे कॉलेज में प्रवेश करते ही स्वहस्तनिर्मित बम फेंक धमाका कर दिया।बायोमेट्रिक युग में रामआसरे आज भी परंपरागत तरीके से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है।धमाका आशा के अनुरूप नहीं था,इसलिए रामआसरे थोड़ा निराश हुआ।कक्षा में प्रवेश किया,नियत स्थान पर जो उसने क्लास के वातावरण के आधार पर स्वयं तय कर लिया था,जाकर बैठ गया।टीचर ने यक्ष प्रश्न किया कि,"कल्पना करिए आप कहीं जा रहे हों और रास्ते में एक लड़की के साथ छेड़खानी हो रही हो तो आप क्या करोगे?"
          क्लास में केवल दो ही लोंगों को प्रश करने का अधिकार था,एक क्लास में टीचर को तथा दूसरा रामआसरे को।भिन्नता यह थी कि टीचर केवल रामआसरे से प्रश्न भर कर सकता था,जबकि रामआसरे प्रश्न भी कर सकता था और टीचर को उसका उत्तर भी देना होता था।रामआसरे टीचर के कल्पना करने वाले प्रश्न में लड़की को छेड़ने की कल्पना कर पाया,क्योंकि वह उसी में सहज था।कक्षा के अन्य छात्रों ने अपने-अपने तरीके से ज्यादातर आदर्शात्मक उत्तर दिए।जो भी लड़की को बचाने की बात करता रामआसरे कल्पना में उसको बलभर कूट कर फिर लड़की को कल्पना में छेड़ने लगता।
            टीचर ने प्रश्न में संसोधन किया और कहा,"जो लड़की छेड़ी जा रही है यदि वह आपकी बहन हो तो आप क्या करोगे?" रामआसरे इस प्रश्न से कल्पना लोक से वास्तविकता की दुनिया मे धड़ाम से गिरा।हालांकि उसे प्रश्न का उत्तर नहीं देना होता है फिर भी वह चौधियाँ सा गया।

         रामआसरे की कल्पना शक्ति शून्य सी हो गयी।वह लड़की और बहन दोनों की कल्पना नहीं कर पा रहा था।थोड़ी सी कल्पना शक्ति जागृत हुई तो वह कल्पना में बहन की रक्षा में स्वयं को मृत पाया।

वैश्विक वेतन की चौंकाने वाली सच्चाई: GDP बढ़ रहा है, असमानता घट रही है, पर आपकी सैलरी क्यों नहीं बढ़ रही?

क्या आपने कभी सोचा है कि जब देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, तो आपकी सैलरी  उस गति से क्यों नहीं बढ़ती? यह एक आम भावना है, लेकिन अंतर्...