रविवार, 5 अप्रैल 2020

आतिशबाजी

                          आतिशबाजी
           कोरोना चीन से चिंग चंग चुंग करता हुआ तथा देश दुनिया का भ्रमण करते हुए जब भारत में प्रवेश किया तो बड़ा उत्साहित था। यहां चीन जैसा जनसंख्या का बेस था जिस पर वह बर्बादी का इतिहास लिखने के लिए तैयार था और साथी थे तबलीगी जमात। कोरोना जहां जाता वहां की स्थानीय भाषा को अख्तियार कर लेता ताकि कार्यवाही में आसानी हो। तबलीगी जमात के सहयोग से कोरोना प्रतापगढ़ में प्रवेश कर गया। उसके प्रवेश की सूचना पर शासन ,प्रशासन और आम लोगों में दहशत फैल गई।
            आगे की कार्यवाही के लिए तबलीगी जमात के सदस्यों के साथ कोरोना की मीटिंग चल ही रही थी कि अचानक से सारी लाइटें आफ हो गईं, उसके बाद टिम-टिम करते दिए जल उठे।कोरोना के सरदार और उसकी टीम को समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है। "ई का वा हो"  टीम के सरदार ने पूंछा।"अरे ई मोदिया सबसे अपील केहे रहा कि आज सब दिया जलाईह" एक सदस्य ने जवाब दिया। अभी ऐसा वार्तालाप चल ही रहा था कि धड़ाम धड़ाम की आवाज आने लगी। आसमान में आतिशबाजी होने लगी। सारे कोरोना को जैसे गोली सा लगने लगा।
           करोना का सरदार सीना पकड़कर तड़पते हुए बोला,"करे सरवा ऊ त केवल दिया जलावे के लिए कहे रहा त ई आतिशबाज़ी कैसे होय लाग।"मुखिया ने जासूस और तबलीगी जमात की ओर शक की निगाहों से देखा। परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी सभी को रोना आतिशबाजी के साथ तड़प-तड़प कर मरने लगे। सरदार ने तबलीगी जमात की ओर देखते हुए अपने अंतिम शब्द बोले,"देख बे भो....के अब त जीतने कोरोना बाहर हैं ऊ सब साले त ई आतिशबाज़ी में नीपुरि जयही।अब तोहरे टीम क ऊपर भरोसा ब कि हमरे मिशन क अंजाम तक पहुंचावा।एक चीज और ई जरूर पता कीह कि दिया के साथ आतिशबाजी क कौने क प्लान रहा।"इतना कहने के उपरांत सरदार का स्विच ऑफ हो गया।
            इस प्रकार आज की आतिशबाजी से बाहर के सारे कोरोना मारे गए लेकिन खतरा अभी टला नहीं है अंदर वह अब भी मौजूद हैं। अब उनके ऊपर सबसे ज्यादा खतरा है जिन्होंने आतिशबाजी का प्लान किया था।
          

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